गैर संवैधानिक निकायों की सूची (List of Non-Constitutional Bodies in Hindi)

गैर-संवैधानिक निकाय या अतिरिक्त-संवैधानिक निकाय (Non-Constitutional Bodies) वे संस्थाएं होतीं हैं जिनको सरकार ने जरुरत पड़ने पर संसद में कोई बिल पास करके स्थापित किया जाता है. गैर-संवैधानिक निकाय कम शक्तिशाली और कम टिकाऊ होते हैं और उन्हें जरूरत पड़ने पर हटाया भी जा सकता है, तात्पर्य यह है कि हमारे संविधान में इन संस्थानों का उल्लेख नहीं है।

योजना आयोग

1. इस आयोग को के.सी. नियोगी की अध्यक्षता में 1946 में गठित योजना सलाहकार बोर्ड की संस्तुति पर भारत सरकार (अर्थात् केंद्रीय मंत्रिमंडल) के एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा मार्च, 1950 में स्थापित किया गया है, इस प्रकार, योजना आयोग न तो एक वैधानिक संस्थान और न ही एक संवैधानिक संस्थान हैI अन्य शब्दों में, यह एक गैर-संवैधानिक या अतिरिक्त-संवैधानिक निकाय (अर्थात् संविधान द्वारा निर्मित नहीं) और एक गैर-वैधानिक निकाय (अर्थात् संसद के एक अधिनियम द्वारा निर्मित नहीं) है। भारत में, यह सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए योजना का सर्वोच्च अंग है। अब, 1 जनवरी, 2015 से इसे एक अन्य निकाय नीति आयोग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है।

2. भारत का प्रधानमंत्री आयोग का पदेन अध्‍यक्ष होता है, वह आयोग की बैठकों की अध्यक्ष्यता करते हैं

3. आयोग का एक उपाध्यक्ष होता है। वह आयोग का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख (अर्थात् पूर्ण कालिक कार्यकारी प्रमुख) होता हैI वह केन्द्रीय मंत्रिमंडल के समकक्ष पंचवर्षीय मसौदे के सूत्रीकरण और उसे प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेदार होता है। इसे केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा निर्धारित समय के लिए नियुक्त किया जाता है और उसका रैंक कैबिनेट मंत्री के समान होता हैI यद्दपि वह कैबिनेट का सदस्य नहीं है, फिर भी उसे कैबिनेट की सभी बैठकों में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया जाता है (वोटिंग के अधिकार के बिना)

नीति (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) आयोग

  • यह योजना आयोग (जो शीर्ष-डाउन मॉडल पर आधारित था) को बदलने के लिए सरकार द्वारा 2015 में स्थापित किया गया है।
  • यह डाउन-अप मॉडल पर आधारित है।
  • यह संपूर्ण भारत के लिए नीति बनाने वाली संस्था है
  • आयोग के अध्यक्ष प्रधान मंत्री हैं।
  • वर्तमान उपाध्यक्ष राजीव कुमार हैं।

संचालन परिषद के स्थायी सदस्य-

  • सभी राज्य के मुख्यमंत्री
  • दिल्ली और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री
  • अंडमान और निकोबार के लेफ्टिनेंट गवर्नर
  • प्रधान मंत्री द्वारा नामित उपाध्यक्ष

राष्ट्रीय विकास परिषद

राष्ट्रीय विकास परिषद (एन.डी.सी) को पहली पंचवर्षीय योजना (मसौदा रूपरेखा) की संस्तुति पर भारत सरकार के एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा अगस्त, 1952 में स्‍थापित किया गया थाI योजना आयोग की तरह, यह न तो एक संवैधानिक निकाय है और न ही एक वैधानिक निकाय।

एनडीसी में निम्नलिखित सदस्य शामिल होते हैं।

  • भारत के प्रधानमंत्री (जो इसके अध्‍यक्ष/प्रमुख होते हैं)
  • केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल के सभी मंत्री (1967 से)
  • सभी राज्यों के मुख्य मंत्री
  • सभी संघ शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री/ प्रशासक
  • योजना आयोग के सदस्य

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (National Human Rights Commission-NHRC)

1. एन.एच.आर.सी एक वैधानिक (संवैधानिक नहीं) निकाय हैI इसे संसद द्वारा अधिनियमित एक अधिनियम अर्थात् मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत 1993 में स्‍थापित किया गया था। इस अधिनियम को 2006 में संशोधित किया गया था।

2. यह आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक अध्‍यक्ष और चार सदस्य शामिल होते हैं। अध्‍यक्ष भारत का सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए।

3. अध्‍यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा छह सदस्यीय समिति जिसमें प्रधानमंत्री इसके प्रमुख, लोक सभा के सभापति, राज्य सभा के उपाध्‍यक्ष, संसद के दोनों सदनों में विपक्षी दलों के नेता और केन्द्रीय गृह मंत्री शामिल होते हैं, की संस्तुति पर की जाती हैI इसके आलावा, भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ विचार-विमर्श करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश को भी नियुक्त किया जा सकता है।

4. अध्‍यक्ष और सदस्‍य 5 वर्ष की अवधि के लिए या 70 वर्ष की आयु पूरी होने, जो भी पहले लागू होता हो, तक पद पर रह सकते हैंI वे इसके बाद केंद्र या राज्य सरकार के तहत किसी भी रोजगार के लिए पात्र नहीं होते हैं।

केन्द्रीय सूचना आयोग (सी.आई.सी)- Central Information Commission

1. सी.आई.सी को 2005 में केंद्र सरकार द्वारा स्‍थापित किया गया था, इसे सूचना का अधिकार (2005) के प्रावधानों के तहत आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के माध्‍यम से गठित किया गया था। अतः, यह एक संवैधानिक निकाय नहीं है।

2. आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त और 10 से अधिक सूचना आयुक्त शामिल नहीं होते हैं।

3. उनकी नियुक्‍त एक समिति जिसमें प्रधानमंत्री, अध्‍यक्ष के तौर पर और लोक सभा में विपक्षी दलों के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल का मंत्री शामिल होता है, की संस्तुति पर राष्‍ट्रपति द्वारा की जाती है।

4. वे सामाजिक सेवा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी, मास मीडिया, प्रबंधन, पत्रकारिता, कानून या प्रशासनिक और शासन में व्‍यापक ज्ञान और अनुभाव के साथ सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित व्‍यक्ति होने चाहिए।

5. वे किसी भी राज्य या संघ शासित प्रदेश के सांसद या विधायक नहीं होने चाहिए। वे किसी भी अन्य लाभ के पद पर या किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हुए या किसी भी प्रकार का व्यावसाय या किसी पेशे से जुड़े हुए नहीं होने चाहिए।

6. उनके पद का कार्यकाल 5 वर्ष की अवधि/ या सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष पूर्ण होने तक होता है जो भी पहले लागू होता हो। वे पुनः नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होते हैं।

7. उन्‍हें एन.एच.आर.सी के मामले में उल्लिखित स्थितियों के अनुसार केवल राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।

केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सी.वी.सी)- Central Vigilance Commission

1. CVC (सी.वी.सी) केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मुख्य एजेंसी है। इसे केंद्र सरकार के एक कार्यकारी प्रस्‍ताव द्वारा 1964 में स्‍थापित किया गया था। इसकी स्थापना भ्रष्टाचार निरोध पर संथानम समिति (1962–64) की संस्‍तुति पर की गई थी।

2. इस प्रकार, वास्ताव में CVC न तो एक संवैधानिक निकाय था और ना ही एक वैधानिक निकाय। सितम्बर, 2003 में, संसद द्वारा अधिनियमित एक कानून के तहत सी.वी.सी को वैधानिक निकाय का दर्जा दिया गया।

3. CVC (सी.वी.सी) एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त (अध्‍यक्ष) और दो से अधिक सतर्कता आयुक्त शामिल नहीं होते हैं।

4. इनकी नियुक्ति तीन सदस्यीय समिति जिसमें प्रधानमंत्री प्रमुख के तौर पर और गृह मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री और लोक सभा में विपक्षी दलों के नेता शामिल होते हैं, की संस्तुति पर राष्‍ट्रपति द्वारा हस्‍ताक्षर तथा मोहर सहित जारी अधिपत्र द्वारा की जाती है।

5. उनका कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक होता है जो भी पहले लागू होता होI उनके कार्यकाल के बाद, वे केंद्र सरकार या राज्य सरकार के तहत किसी भी रोजगार के लिए पात्र नहीं होते हैं।